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BHARAT VIKAS PARISHAD - AN OVERVIEW

भारत विकास परिषद की स्थापना वर्ष १९६३ में की गयी थी, यह समाज के विभिन्न व्यवसायों एवं कार्यों में लगे हुए श्रेष्ठ लोगों का एक गैर सरकारी पंजीकृत संगठन है ।

इस संस्था की स्थापना का उद्देश्य समाज का सर्वांगिण विकास करना है इस विकास में सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, राष्ट्रीय एवँ अध्यात्मिक सभी प्रकार का विकास समाहित है । परिषद् की गतिविधियाँ पाँच सूत्रों के आधार पर चलती है-

सम्पर्क- परिषद् परिवार हमें यह सुअवसर प्रदान करता है कि हम अपने आत्मीय एवं मधुर व्यवहार द्वारा विशालतम् समाज के बीच पहुँचाकर अपने सम्पर्कों का दायरा बढ़ायें ।

सहयोग- परिषद् परिवार में एक ऐसा माहौल है जहाँ हम साथ-साथ सोचते हैं । हम साथ-साथ चलते हैं एवं साथ-साथ कार्य करते हैं ।

संस्कार- परिषद् परिवार अपने मधुर एवं पुष्ट विचारों के द्वारा नवांगतों में श्रेष्ठ संस्कार प्रस्फुटित करने का प्रयास करता है ।

सेवा- परिषद परिवार ने सेवा को एक मूल मंत्र के रूप में आत्मसात किया है । परिषद् एक सेवा का सशक्त माध्यम है जहाँ हम अपने समस्या को एक छत के नीचे एकत्रित कर समाज की आवश्यकता महसूस करते हुए उसके विकास में उत्कृष्ट योगदान करते हैं ।

समर्पण- प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सामाजिक क्षेत्र, पारिवारिक क्षेत्र या व्यवसायिक क्षेत्र में सफलता उसके कदमों में हो सकती है अगर वह प्रत्येक क्षेत्र में समर्पण भाव से अफना योगदान देता हो । परिषद् परिवार यही प्रयास करता है कि उसके सदस्यों के अन्तर्मन में समर्पण भाव का उद्भव हो वह अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बुलन्दियों को छुए ।

संगठन - भारत विकास परिषद् सम्पूर्ण भारत में लगभग हर एक कोने में गतिशील हैं । कार्य की दृष्टि से देश को ४१ प्रदेशों और १३ क्षेत्रों में विभाजित किया गया है । परिषद् परिवार ने विदेशों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रखी है । संगठन का केन्द्रीय कार्यालय नई दिल्ली में कार्यरत है ।

भारत विकास परिषद् परिवार समाज के विभिन्न व्यावसायों एवं कार्यों में लगे हुए श्रेष्ठ लोगों का एक गैर सरकारी पंजीकृत संगङ्गन है ।

परिषद् व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास का सशक्त माध्यम है जैसे आपने पाङ्गशाला और महाविद्यालयों के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षा का अवश्य लाभ उङ्गाया होगा । आज अपने क्षेत्र में कार्य आरम्भ करने हेतु आप तैयार होंगे या आरम्भ कर लिया होगा । जहाँ आप विख्यात विशेषज्ञ होंगे । यह भी सम्भव है कि आपका प्रभुत्व तथ्यों के साथ हो ।

यह आप अच्छे कार्यों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, आपकी योजनाएँ, उमंग और अभिलाषा को व्यवहार स्वरूप प्रदान करने हेतु आपको कई व्यक्तियों के सम्पर्वâ में आना पड़ता है और प्रत्येक दो व्यक्ति समान नहीं होते । वे एक दूसरे से भिन्न होते हैं, जैसे एक हाथ की दो उँगलियाँ ।

इसलिए स्वयं को उत्तम बनाने हेतु आपको अपनी योग्यताओं का विकास करना होगा, ताकि आप उन्नति ही राह पर नेतृत्व कर सके जो पहले आप ही के भीतर का हो और तत्पश्चात दूसरों के साथ जो आपको आपकी इच्छा की प्राप्ति करा सके और जिस लक्ष्य को आप प्राप्त करना चाहें, प्राप्त कर सवेंâ।

यह आप स्वयं बिना किसी के सहयोग के नहीं कर सकते । यह सहयोग आप को परिषद परिवार के माध्यम से प्राप्त हो सकता है ।

किन्तु परिषद परिवार आपके समक्ष यह प्रश्न रखता है कि क्या आप अपने प्रयासों का अंश परिषद परिवार को प्रदान करने हेतु तत्पर हैं ?

किन्तु यह अंश आप केवल धन या समय के माध्यम से प्रदान नहीं कर सकते । बल्कि आपकी इच्छा और अभिलाषा द्वारा आपके अनुवूâल एवं प्रतिवूâल तथ्यों को मान्यता दी जा सकती है ।

अत: इस लाभ की प्राप्ति हेतु अपना अंश समर्पित करें ।

सक्रिय एवं उद्देश्यपूर्ण तरीके से आपके सम्मिलित होने की आकांक्षा के साथ.....

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BHARAT VIKAS PARISHAD - KASHI PRANT

img समाज की आवश्यकता ही किसी भी संस्था की जनक होती है | इसी आशय से भारत विकास परिषद का गठन भारत की राजधानी दिल्ली में 10 जुलाई सन 1963 को हुआ1 अपने सद्विचारों की गरिमा बिखेरता परिषद जहां भारत के विभिन्न शहरों में अपना प्रकाश फैला रहा था वहीं काशी भी इसके आलोक से भारत विकास परिषद वाराणसी के नाम से सन 1983 में आलोकित हो उठी | उत्तर प्रदेश के तात्कालिक चीफ इंजीनियर श्री रामचंद्र शर्मा जी की अध्यक्षता में काशी में परिषद की पहली शाखा (भारत विकास परिषद वाराणसी ) की स्थापना हुई , जिसमें सचिव का कार्य भार IT के प्रोफेसर श्री बांके बिहारी श्रीवास्तव जी ने संभाला | शाखा का उद्घाटन समारोह राष्ट्रीय अध्यक्ष लाला हंसराज गुप्ता व राष्ट्रीय महासचिव श्री सूरज प्रकाश जी की उपस्थिति में हुआ | शीर्षस्थ विद्वानों से सुशोभित शाखा के संरक्षक डॉक्टर भानु शंकर मेहता जी थे| काशीनगर के मानिंद एवं संभ्रांत जनश्री ब्रह्मानंद पेसवानी ,श्री भवरलाल राठी, श्री प्रेमदास जी, श्री अरविंद रस्तोगी अदि इसके प्रमुख सदस्य थे |

तत्पश्चात भारत विकास परिषद की भारतीय संस्कारों से ओत-प्रोत कार्यप्रणाली व कार्यक्रमों से प्रभावित होकर काशी नगर में परिषद की अन्य शाखाओं के खुलने का अनवरत क्रम जो सन 1987 28 से भारत विकास परिषद काशी शाखा की स्थापना के साथ प्रारंभ हुआ वह अनवरत रुप से आज तक जारी है | और इस क्रम में धीरे धीरे बढ़कर क्रमशा: इस विकास यात्रा में अब तक काशी प्रांत में 30 शाखाओं की स्थापना हो चुकी है | 27 सदस्यों से प्रारंभ होकर आज कशी प्रांत में परिषद के लगभग 1400 सदस्य हैं| नित नई संभावनाओं के साथ पुष्पित , पल्लवित हो रही परिषद की इस विकास यात्रा में वर्तमान समय में प्रांत से तीन विकास रत्न श्री भोलाराम बरनवाल , श्री शिवम बरनवाल , श्री पंकज पटेल तथा 80 विकास मित्र हैं|